अहले बैत ..... श्रेष्ठ कथन



ज्ञान प्राप्ती में हसद

इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस सलाम ने फ़रमाया:

لا یکون العبد عالما حتی لا یکون حاسدا لمن فوقہ و لا محقرا لمن دونہ

कोई भी इंसान ज्ञान प्राप्त नही कर सकता अगर वह इस काम में अपने से बड़ों से हसद और छोटों को तुक्ष्य समझेगा।

स्रोत (किताब तोहफ़ुल उक़ूल पेज 293)

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दुखी के साथ बर्ताव

इमाम हसन असकरी अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

لیس من الادب اظھار الفرح عند المحزون

दुखी के सामने प्रसन्नता व्यक्त करना शिष्टता के ख़िलाफ़ है।

स्रोत (किताब तोहफ़ुल उक़ूल पेज 489)

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मोमिन की सहायता

इमाम अली रज़ा अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

من فرج عن مومن فرج اللہ عن قلبہ یوم القیامۃ

जो कोई भी मोमिन की परेशानी और मुश्किल को हल करेगा, क़यामत के दिन अल्लाह तआला उसके दिल से परेशानी को दूर करेगा।

स्रोत (किताब उसूले काफ़ी भाग 4 पेज 268)

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ईश्वर अपरिचित

इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

ما عرف اللہ من عصاہ

गुनाह करने वाले ने ईश्वर को पहचाना ही नही है।

स्रोत (किताब तोहफ़ुल उक़ूल पेज 294)

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सबसे बड़ा गुनाह

इमाम अली अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

اشد الذنوب ما استھان بہ صاحبہ

सबसे बड़ा गुनाह वह है जिसे करने वाला छोटा समझे।

स्रोत (नहजुल बलाग़ा हदीस 348)

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बुद्धि का बली स्थान

इमाम अली अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

اکثر مصارع العقول تحت بروق المطامع

अक़्ल की बलि अकसर लालच की वजह से चढ़ती है।

स्रोत (किताब मुहाज़ेरात भाग 1 पेज 251)

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अनपढ़

इमाम अली अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

لا تری الجاھل الا مفرطا او مفرطا

जाहिल हमेशा या इफ़रात (हद से आगे बढ़ जाना) करता है या तफ़रीत (हद से पीछे रह जाना)

स्रोत (किताब अन निहाया भाग 3 पेज 435

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ख़ामोशी व न्याय

इमाम अली अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

بکثرۃ الصمت تکون الھیبۃ، و وبالنصفۃ یکثر المواصلون

ज़्यादा चुप रहना रोब व दबदबे और न्याय करना दोस्तों के ज़्यादा होने का कारण बनता है।

स्रोत (किताब ................................................................

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ग़रीबी व अमीरी की ज़ीनत

इमाम अली अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

العفاف زینۃ الفقر، و الشکر زینۃ الغنی

पाकदामनी ग़रीबी की और शुक्र अमीरी की ज़ीनत है।

स्रोत (किताब तोहफ़ुल उक़ूल पेज 75)

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तुम्हारा अच्छा गुमान करना

इमाम अली अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

من ظن بک خیرا فصدق ظنہ

अगर तुम्हारे बारे में किसी ने नेक गुमान किया है तो उसके (अपने अमल से) गुमान को सच कर दिखाओ।

स्रोत (किताब नहजुल बलाग़ा हदीस 31)

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जल्दी क़ुबूल होने वाली दुआ

इमाम अली अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

اوشک دعوۃ و اسرع اجابۃ دعاء المرء لاخیہ بظھر الغیب

किसी मोमिन के पीछे उसके लिये की जाने वाली दुआ के क़ुबूल होने और जल्दी क़ुबूल होने की उम्मीद ज़्यादा है।

स्रोत (किताब उसूले काफ़ी भाग 1 पेज 52)

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सबसे ताक़तवर इंसान

इमाम मूसा काज़िम अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

من اراد ان یکون اقوی الناس فلیتوکل علی اللہ

जो सबसे ज़्यादा ताक़तवर बनना चाहता है उसे चाहिये कि वह अल्लाह पर भरोसा करे।

स्रोत (किताब बेहारुल अनवार भाग 7 पेज 143)

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अच्छी बात स्वीकारना

इमाम मुहम्मद बाक़िर अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

خذوا الکلمۃ الطیبۃ ممن قالھا و ان لم یعمل بھا

अच्छी और नेक बात कोई भी कहे उससे ले लो, चाहे वह ख़ुद भी उस पर अमल न करता हो।

स्रोत (किताब तोहफ़ुल उक़ूल पेज 391)

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कृपा की समझ रखना

इमाम मूसा काज़िम अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

من لم یجد للاسائۃ مضضا لم یکن عندہ لاحسان موقع

जिसने सख़्ती व परेशानी का मज़ा नही चखा है उसके नज़दीक नेकी व एहसान का कोई महत्व नही है।

स्रोत (किताब बेहारुल अनवार भाग 78 पेज 333)

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नेमत जिस पर कोई नही जलता

इमाम हसन असकरी अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

التواضع نعمۃ لا یحسد علیھا

नम्रता व सत्कार ऐसी नेमत पर जिस पर किसी को हसद व जलन नही होती।

स्रोत (किताब तोहफ़ुल उक़ूल पेज 489)

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दरिन्दा जानवर

इमाम अली अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

اللسان سبع، ان حلی عنہ عقر

ज़बान, एक ऐसा दरिन्दा जानवर है जिसे अगर आज़ाद छोड़ दिया जाये तो वह चीर फाड़ डालती है।

स्रोत (किताब नहजुल बलाग़ा)

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शिष्टाचार का स्थान

इमाम हसन असकरी अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

کفاک ادبا تجنبک ما تکرہ من غیرک

शिष्टाचार के लिये बस यह काफ़ी है कि इंसान जो दूसरे लिये नापसंद करे ख़ुद भी उससे दूरी इख़्तियार करे।

स्रोत (किताब मुसनदे इमाम असकरी पेज 288)

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आधी रात में सफ़र

इमाम हसन असकरी अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

ان الوصول الی اللہ عز و جل سفر لا یدرک الا بامتطاء اللیل

अल्लाह तक पहुचना एक सफ़र है जो आधी रात में इबादत के बिना पूरा नही हो सकता।

स्रोत (किताब मुसनदे इमाम असकरी पेज 290)

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बुराईयों की शुरुवात

इमाम हसन असकरी अलैहिस सलाम ने फ़रमाया

جعلت الخبائث فی بیت و جعل مفتاحہ الکذب

सारी बुराईयों को एक घर में बंद कर दिया गया है और उस घर की चाभी झूठ है।

स्रोत (किताब बेहारुल अनवार भाग 78 पेज 377